

नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) नैनीताल सुबीर कुमार की अदालत ने अनुसूचित जाति की युवती को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोपी युवक को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। युवक ने पीड़िता को शादी का झांसा देकर कई बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने एवं बाद में जाति के आधार पर शादी से मुकर गया।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान बताया गया कि आरोपी नितीश नैनवाल पुत्र लीलाधर नैनवाल निवासी ग्राम ढिकुली गर्जिया, थाना रामनगर, जिला नैनीताल को धारा-376(2) (एन) भा.द.सं. एवं 3(2) (v) एस०सी०एस०टी०एक्ट के अन्तर्गत दोषी करार कर न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेजा।
मामले में पीडिता द्वारा 15 फरवरी 2022 को थाना रामनगर में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज करायी था कि आरोपी ने पीड़िता के साथ पिछले दो सालों से शारीरिक संबंध बनाये, रिपोर्टकर्ता ने सोचा कि यह मेरे साथ शादी करेगा। अब वह शादी के लिए मना कर रहा है, नितिश रिपोर्टकर्ता को 07.02.2022 को यह कहकर अपने साथ जिम कॉर्बेट सफारी पर ले गया कि उसके कुछ दोस्त, लड़किया भी आ रही है, परन्तु ऐसा कुछ नहीं हुआ, जब इसके साथ जिम कॉर्बेट गयी तो अभियुक्त ने पीड़िता से कहा कि यह लोग यानि कि उसके दोस्त दूसरी गाड़ी से आ रहे है. साथ ही यह नहीं बताया था कि सफारी नाईट स्टे है और पीड़िता से कहा कि शाम को वापस आ जायेंगे, लेकिन अभियुक्त द्वारा पीड़िता को जूस में कुछ नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया और बेहोशी हालत में शारीरिक संबंध बनाये। दिनांक 08. 02.2022 को पीड़िता के घरवालों ने धनगड़ी गेट पर पीड़िता बेहोशी हालत पर पाया और अभियुक्त व पीड़िता के परिवार वाले दोनों लोगों को पुलिस चौकी गर्जिया ले गए। पूछताछ करने पर अभियुक्त पीड़िता से 7 दिन के अंदर शादी करने के लिए तैयार हो गया और उसके बाद गर्जिया चौकी से ही पीड़िता को अपने साथ ले जाकर अन्य होटलों में उसके साथ शारीरिक संबंध बनाये। 7 दिन व्यतीत होने पर के बाद भी पीड़िता के साथ कोर्ट मैरिज करने से इंकार कर दिया। बोला कि तुम शिल्पकार परिवार से हो, में ब्राहाण परिवार से हूँ, शादी नहीं हो सकती है. शुरूआत में कहा था कि मैं जाति पात नहीं मानता हूँ और शादी करूंगा।
अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी नैनीताल सुशील कुमार शर्मा ने अभियोजन तथ्यों को साबित करने हेतु मामले में कुल 17 गवाहों के बयान दर्ज कराये और सुनवाई के दौरान अभियोजन द्वारा मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया कि अभियुक्त ब्राहमण जाति का होने के उपरान्त पीड़िता के साथ शादी करने का झांसा देकर कई बार विभिन्न स्थानों पर ले जाकर बलात्कार किया, जबकि पीड़िता ने पूर्व में ही अभियुक्त से कहा था कि वह शिल्पकार जाति की है। अभियुक्त ब्राहमण जाति के हो. उसके बाद भी पीड़िता को यह आश्वासन दिया कि अभियुक्त जाति को नहीं मानता है व शादी करेगा, बाद में शादी करने से इंकार किया।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश (एस०सी०एस०टी०एक्ट) नैनीताल सुबीर कुमार द्वारा अपने निर्णय में यह भी उल्लेख किया कि अभियुक्त नितीश नैनवाल द्वारा यह जानते हुए कि पीड़िता अनुसूचित जाति की है और उसके साथ संपर्क बढ़ाया, तत्पश्चात पीड़िता को विवाह के भ्रम में रखते हुए उसके साथ लगातार शारीरिक संबंध बनाकर बलात्कार किया। अभियुक्त का अपराध अत्यन्त गंभीर है. उसे अभियुक्त को लम्बे समय तक न्यायिक अभिरक्षा में रखने से उसे अपने अपराध का प्रायश्चित करने का समुचित अवसर मिलेगा, साथ ही अभियुक्त को समुचित दण्ड देने से पीड़िता को न्याय मिलेगा तथा अपराध में लिप्त अन्य व्यक्तियों को भी अपराध से दूर रहने का सबक मिलेगा।
न्यायालय द्वारा अभियुक्त नितीश नैनवाल को धारा-376(2) (एन) भा०द०सं० के अन्तर्गत आजीवन कठोर कारावास व 20 हजार रुपए अर्थदण्ड से दंडित किया गया, अर्थदण्ड अदा न करने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाते हुए धारा-3(2) (वी) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अन्तर्गत दोषी पाते हुए कठोर आजीवन कारावास व 20 हाजार रूपये के अर्थदण्डति करने का आदेश किया है। अर्थदण्ड की धनराशि में से 30 हजार रुपए पीड़िता की प्रतिकार के रूप में देने के आदेश किये हैं।
न्यायालय जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष न्यासीएसटी) नैनीताल सुबीर कुमार द्वारा अपने निर्णय में यह भी आदेश किया है कि पीड़िता को पारा-3570 के तहत अपराध पीडित सहायता योजना 2013 एवं अन्य अपराधों पीडित की पर प्रतिकर योजना 2020 के तहत जिला विधिक दिलाये जाने हेतु आदेश किया है।


