
देहरादून। ऋषिकेश में आठ साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के दोषी को न्यायालय ने बीस साल कठोर कैद की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पॉक्सो मंजू सिंह मुंडे की अदालत ने सोमवार को दिए फैसले में दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
दोषी अशोक ऋषिकेश में एक सार्वजनिक शौचालय में पैसे लेने का काम करता था। एक जुलाई 2025 को शौच के लिए पहुंची मासूम बच्ची के साथ अशोक ने बाथरूम में दरिंदगी की। बच्ची के शोर मचाने पर उसके पिता और भाई ने दरवाजा तोड़कर उसे बचाया और आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया।
शासकीय अधिवक्ता किशोर कुमार ने बताया कि सुनवाई के दौरान फॉरेंसिक जांच में दोषी और पीड़िता का डीएनए मिलान नहीं हुआ था। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि केवल डीएनए रिपोर्ट नेगेटिव होने से आरोपी निर्दोष साबित नहीं होता। खासकर तब जब पीड़िता की गवाही पूरी तरह से सत्य और अडिग हो। बच्ची ने कोर्ट में भी दोषी को स्पष्ट रूप से पहचाना था। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर अशोक को बीस साल की सजा सुनाने के साथ अलग-अलग धाराओं में कुल एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया।

