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हल्द्वानी। हल्द्वानी के बागजाला गांव में वन विभाग के कुछ कर्मचारियों द्वारा पिछले कुछ दिनों से ग्रामीणों को डराने धमकाने और मरम्मत का काम रोका जा रहा है। इसके साथ ही जल जीवन मिशन की योजना, सड़कों की मरम्मत आदि की स्वीकृति दिए जाने की मांग के संबंध में प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) तराई पूर्वी वन प्रभाग, हल्द्वानी कार्यालय के सम्मुख अखिल भारतीय किसान महासभा ने प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों के संबंध में एसडीओ से वार्ता कर ज्ञापन सौंपा।

 

किसान महासभा के वक्ताओं ने कहा कि, बागजाला गांव में वन विभाग के कतिपय कर्मचारियों द्वारा पिछले कुछ दिनों से ग्रामीणों को डराने धमकाने और मरम्मत का काम रोकने का काम किया जा रहा है. जबकि सभी परिवार गांव में पहले से ही रह रहे हैं इनमें कोई भी नया बसने वाला नहीं है. ये सभी गरीब लोग हैं और अधिकांश झोपड़ी या टिन शेड में रह रहे हैं, कई की छत पर तो केवल पोलीथीन शीट ही पड़ी है. इसलिये बरसात में कहीं झोपड़ी में पानी न घुस आये इसलिये बरसात से पूर्व मरम्मत का कार्य करना चाहते हैं. उल्लेखनीय है कि, जिला प्रशासन के साथ 24 नवंबर 2025 को हुए समझौते में जिसमें वन विभाग के प्रतिनिधि के रूप में एसडीओ मौजूद थे, यह समझौता हुआ था कि गांव पुराने समय से रह रहे लोगों को घरों में टूट फूट, लीकेज आदि होने पर मरम्मत के कार्य से रोका नहीं जायेगा. 6 अप्रैल 2026 को डीएफओ तराई पूर्वी कार्यालय के सम्मुख धरने के उपरांत सभागार में बागजाला के ग्रामीणों की मौजूदगी में किसान महासभा के प्रतिनिधियों के साथ हुई वार्ता में स्वयं डीएफओ ने भी मरम्मत के कार्य को करने पर रोक नहीं होने की बात कही थी. इसके बावजूद वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा ग्रामवासियों को मरम्मत के कार्य से न सिर्फ रोका जा रहा है बल्कि उन्हें डराया धमकाया भी जा रहा है वन विभाग के कर्मचारियों के इस व्यवहार पर तत्काल रोक लगनी चाहिए और गांव वासियों को मरम्मत के कार्य को करने से नहीं रोका जाना चाहिए।

 

भाकपा माले नैनीताल जिला सचिव डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, बागजाला गांव में वन विभाग द्वारा खेला जा रहा चूहे बिल्ली का खेल बंद होना चाहिए. वन विभाग को अपनी मनमानी बंद कर ग्रामवासियों को मरम्मत के कार्य से रोकने और डराने धमकाने का काम तत्काल बंद करना चाहिए और गांव के विकास को अवरुद्ध करने की कोशिशों पर रोक लगानी चाहिए.

 

किसान महासभा बागजाला की अध्यक्ष डॉ उर्मिला रैस्वाल ने कहा कि, गांव में जल जीवन मिशन की योजना को शुरू करने का जल संस्थान का प्रस्ताव वन विभाग की अनुमति दिए जाने की राह देख रहा है. इसके अतिरिक्त सड़कों की मरम्मत की अनुमति के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा भी वन विभाग को पत्र भेजा गया है जिस पर वन विभाग तत्काल निर्णय ले.

 

पूर्व प्रधानाचार्य प्रेम सिंह नयाल ने कहा कि, बागजाला गांव में जल जीवन मिशन की योजना को शुरू करने और सड़कों की मरम्मत जैसे जरूरी विकास कार्य बजट स्वीकृत होने के बावजूद वन विभाग द्वारा स्वीकृति न किए जाने के कारण रुकी पड़ी हैं। जिस कारण गांव के लोग पीने के पानी, बेहतर सड़क जैसी मूलभूत जरूरतों से वंचित हैं, जबकि ये सभी अधिकार सरकार की योजनाओं के तहत सुनिश्चित होने चाहिए।

 

किसान महासभा ने मांग उठाई कि

बागजाला गांव में ग्रामवासियों को मरम्मत के कार्य से न रोका जाय, उन्हें वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा डराने धमकाने पर रोक लगे और ऐसे कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की जाय.

जल जीवन मिशन के तहत पेयजल योजना को तुरंत स्वीकृति प्रदान की जाए।

गांव की सड़कों की मरम्मत कार्यों को बिना देरी के अनुमति दी जाए।

बरसाती नहर के किनारे रहने वाले लोगों के लिए पक्के रास्ते का निर्माण किया जाय और नहर के किनारों की मरम्मत की जाए।

डीएफओ महोदय द्वारा पूर्व में किसान महासभा के प्रतिनिधियों से किया गया गांव में स्ट्रीट लाइट/सोलर लाइट लगाने का वादा पूरा किया जाय।

वन विभाग द्वारा बागजाला वासियों को पूर्व में दिए गए सभी नोटिस वापस लिए जाएँ। किसान महासभा ने अल्टीमेटम दिया मांगों पर यथासमय निर्णय नहीं लिया गया तो बागजाला वासियों को अखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत्व में जनआंदोलन की शुरूआत करते हुए पुनः अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू करने को बाध्य होना पड़ेगा। जिसकी समस्त जिम्मेदारी वन विभाग की होगी।

प्रदर्शन में डॉ कैलाश पाण्डेय, डॉ उर्मिला रैस्वाल, प्रेम सिंह नयाल, विमला देवी, दीवान सिंह बर्गली, मीना भट्ट, रेशमा, मुस्लिमा, सुलेमान मलिक, हेमा आर्य, भूरा, जफर, भोला सिंह, कौशल पाठक, नसीम, हेमा देवी, रफी, नंद किशोर, सुनीता, नंदी, हेमलता समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।

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