
देहरादून। देशभर में साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम देने वाले संगठित गिरोह का खुलासा करते हुए साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में तीन आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि अभियुक्त साइबर ठगी से प्राप्त रकम को बैंक खातों के माध्यम से संग्रहित कर उसकी लेयरिंग और वितरण कर वास्तविक अपराधियों तक पहुंचाने का काम कर रहे थे। तीनों आरोपी देहरादून के रहने वाले हैं।
साइबर क्राइम थाना में तैनात निरीक्षक सुधीर कुमार की ओर से दी गई तहरीर के अनुसार, देश के विभिन्न राज्यों में निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, शेयर मार्केट फ्रॉड, ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड, टास्क फ्रॉड और पार्ट टाइम जॉब फ्रॉड जैसे साइबर अपराधों के जरिये लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही है। इस धनराशि को छिपाने और वास्तविक अपराधियों तक पहुंचाने के लिए तथाकथित म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल किया जाता है।
प्रारंभिक जांच में एनसीआरपी पोर्टल, सीएफसीएफआरएमएस, आई4सी, बैंक अभिलेखों, केवाईसी दस्तावेजों और मनी ट्रेल विश्लेषण के आधार पर पाया गया कि इंडियन ओवरसीज बैंक के एक खाते में साइबर अपराधों से संबंधित धनराशि प्राप्त हुई थी। खाते में करीब 7.10 लाख रुपये जमा होने के बाद धनराशि को तत्काल अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। एटीएम, चेक, पीओएस मशीन और यूपीआई के माध्यम से निकासी कर मनी ट्रेल को जटिल बनाया गया।
जांच में खाताधारक राकेश रोशन पर आरोप है कि उसने आर्थिक लाभ और कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग सुविधाएं साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराईं। पुलिस के अनुसार, इन संसाधनों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के संग्रहण, छिपाने और वितरण के लिए किया गया।
मामले में राकेश रोशन के अलावा कृष अरोड़ा और अनुराग को भी आरोपी बनाया गया है।
एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि तीनों आरोपी एक संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट के सदस्य के रूप में कार्य करते हुए विभिन्न राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर कर ठगों तक पहुंचाने का काम कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में फर्जी केवाईसी दस्तावेजों, फर्जी फर्मों, विभिन्न मोबाइल नंबरों, ई-मेल आईडी और इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स के उपयोग के संकेत भी मिले हैं। इसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।

