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देहरादून,। राज्य में बनने वाली सभी दवाओं व उनके कच्चे माल(एपीआई: सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक) की जांच जरूरी कर दी गई है। साथ ही दूसरे राज्यों से उत्तराखंड में आने वाली हर दवा की भी सैंपलिंग होगी। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अपर आयुक्त व ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने सोमवार को ये जानकारी दी। दून स्थित कार्यालय में हुई पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार ने यह कदम उठाया गया है।

अपर आयुक्त ने कहा कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। इसी के तहत दवाओं और एपीआई की जांच कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सभी दवा निर्माता कंपनियों और एपीआई की सप्लायर फर्मों के साथ मेडिकल स्टोरों को भी आदेश दे दिए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि तमिलनाडु की में बनी कोल्ड्रिफ या अन्य किसी दवाई की आपूर्ति उत्तराखंड में नहीं हुई है।
ड्रग कंट्रोलर ने बताया कि उत्तराखंड सरकार ने प्रदेशभर के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में दूसरे राज्य से आपूर्ति की गई दवाओं की सूची मांगी है। सूची के आधार पर ही दवाओं की जांच की जाएगी। बीते दो दिन में 78 दवाओं के सैंपल जांच को भेजे जा चुके हैं। इसके तहत सरकारी अस्पतालों के अलावा प्राइवेट अस्पतालों, मेडिकल स्टोरों और दवा फैक्ट्रियों में भी जांच की जा रही है।

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