
किच्छा। पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर फर्जी वसीयत तैयार कर करोड़ों रुपये की संपत्ति और मुआवजा हड़पने के आरोप में सात नामजद आरोपियों के साथ वर्ष 2005-06 के दौरान किच्छा चकबंदी कार्यालय एवं न्यायालय में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
ग्राम सिरसा फार्म, बहेड़ी निवासी मानवेंद्र सिंह पुत्र नरेंद्र सिंह ने न्यायिक मजिस्ट्रेट, किच्छा के समक्ष दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि वह बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की न्यायिक सेवाओं में कार्यरत रहे और वरिष्ठ निबंधक, उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। आरोप है कि न्यायिक दायित्वों के कारण वह अपने पिता की बहेड़ी और किच्छा स्थित कृषि, आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों की देखभाल अपने छोटे भाई यक्षेंद्र सिंह के माध्यम से कराते थे। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि उनके पिता नरेंद्र सिंह की किच्छा में दो राजमार्गों पर स्थित भूमि को कई हिस्सों में विभाजित कर अधिकांश भूमि का अंतरण कर दिया गया। आरोप है कि किच्छा चकबंदी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से उनके पिता के नाम से कूटरचित (फर्जी) अपंजीकृत वसीयत तैयार कर करोड़ों रुपये का मुआवजा हड़प लिया गया। कहा कि सितंबर 2004 से फरवरी 2005 में मृत्यु तक उनके पिता डायलिसिस पर थे।23 नवंबर 2004 को उनके द्वारा अपंजीकृत वसीयत करना संभव नहीं था। कोतवाल रवि कुमार ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर सुरजीत सिंह पुत्र नंदन सिंह, सिमरजीत सिंह पुत्र महेंद्र सिंह निवासी किच्छा, विनोद कुमार पुत्र बालमुकंद निवासी रुद्रपुर, रमन कुमार पुत्र मदन मोहन निवासी खुशी एन्क्लेव, रुद्रपुर, भजन लाल पुत्र महेंद्र सिंह निवासी किच्छा, प्रमोद सिंह पुत्र राममूर्ति सिंह निवासी शुगर फैक्ट्री, किच्छा और यक्षेंद्र सिंह पुत्र नरेंद्र सिंह निवासी ग्राम सिरसा फार्म, बहेड़ी के अलावा वर्ष 2005-06 के दौरान चकबंदी कार्यालय एवं न्यायालय में तैनात संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

