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देहरादून। डीएलएड प्रशिक्षण के लिए उत्तर प्रदेश और नौकरी पाने के लिए उत्तराखंड का स्थाई निवास प्रमाण पत्र बनाने वाले शिक्षक बड़ी मुश्किल में फंस गए हैं। हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद प्राथमिक शिक्षा विभाग ने दोहरे स्थाई निवास में में फंसे ऐसे 152 शिक्षकों को अपना पक्ष रखने के लिए सुनवाई का अंतिम मौका दिया है।

 

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को ऐसे सभी शिक्षकों को इज मंगलवार 10 अगस्त को सुबह साढ़े 11 बजे ऑनलाइन पेश करने के निर्देश दिए हैं। अभी तक जिलों की ओर से ऐसे शिक्षकों को चिन्हित कर उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। अब इन शिक्षकों को अपने पक्ष में पर्याप्त और वैध साक्ष्य प्रस्तुत करने का अंतिम मौका दिया जा रहा है। अगर वह ऐसा नहीं कर पाते हैं तो इनके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई तय मानी जा रही है।

उच्च न्यायालय नैनीताल के आदेश के पालन में शिक्षा निदेशालय की ओर से अधिकारियों को इसे लेकर विस्तृत निर्देश दिए गए हैं। अंतिम सुनवाई के बाद शिक्षा विभाग की ओर से रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी जाएगी।

यह पूरा मामला वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान हुई प्राथमिक सहायक अध्यापकों की भर्ती से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि उत्तर प्रदेश में डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए वहां का मूल निवास प्रमाण पत्र अनिवार्य होता है। इसके बावजूद कई अभ्यर्थियों ने यूपी से डीएलएड किया और उत्तराखंड में नियुक्ति के वक्त यहां का स्थाई निवास लगाकर शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली।

राज्य में जिला स्तर पर 1649 पदों पर हुई भर्तियों में सामने आई इस गड़बड़ी से शिक्षा विभाग के अफसरों की कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि भर्ती प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की सही जांच नहीं की गई और दोहरे स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की अनदेखी की गई। जिससे पात्र अभ्यर्थी शिक्षक बनने से चूक गए।

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