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ऊधमसिंहनगर। बैंक ऑफ इंडिया की सितारगंज शाखा में रिकवरी और सेटलमेंट का कार्य देख रहे एक रिकवरी एजेंट पर कई खाताधारकों से लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। शाखा प्रबंधक की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी पर ग्राहकों से नकद राशि लेकर बैंक की फर्जी मोहर और शाखा प्रबंधक के जाली हस्ताक्षर वाली रसीदें देने का आरोप है।

 

शाखा प्रबंधक प्रमोद सिंह बिष्ट ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि नगला निवासी खाताधारक पूरन सिंह ने शिकायत की थी कि 4 मई को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के नवीनीकरण के लिए उन्होंने 1.65 लाख रुपये रिकवरी एजेंट राहुल तिवारी को नकद दिए थे। आरोपी ने बैंक की मोहर लगी और हस्ताक्षरयुक्त रसीद भी दी, लेकिन 1 जून को बैंक पहुंचने पर पता चला कि खाते में कोई राशि जमा ही नहीं हुई। शाखा प्रबंधक के अनुसार, राहुल तिवारी निवासी अलीगंज बबुरी, जनपद अमेठी उत्तर प्रदेश बैंक का कर्मचारी नहीं, बल्कि आउटसोर्स कंपनी मैसर्स विजयलक्ष्मी बैंकिंग सर्विसेज का कर्मचारी है। उसे केवल एनपीए खातों की रिकवरी और सेटलमेंट के लिए नियुक्त किया गया था। आरोप है कि उसने बैंक परिसर में कार्यरत होने का लाभ उठाकर खुद को बैंक कर्मचारी बताकर ग्राहकों का विश्वास जीता और धोखाधड़ी की। एसएसआई जावेद मलिक ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

पूरन सिंह का मामला सामने आने के बाद कई अन्य पीड़ित भी बैंक पहुंचे। प्रारंभिक जांच में बैंक रिकॉर्ड और ग्राहकों को दी गई रसीदों में भारी विसंगतियां मिली हैं। शिकायतकर्ताओं में प्रेम प्रकाश (2 लाख रुपये), मोहम्मद मुस्तकीम (2 लाख रुपये), मैसर्स गब्बर एंटरप्राइजेज (2.15 लाख रुपये), पूरन सिंह (1.65 लाख रुपये), छोटे लाल (1.12 लाख रुपये), भागीरथ प्रसाद (1.05 लाख रुपये) और धरम सिंह (75 हजार रुपये) शामिल हैं। इन सभी ने धनराशि के गबन की शिकायत दर्ज कराई है।

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