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नैनीताल। हाईकोर्ट ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा कई अभ्यर्थियों के परीक्षा में बैठने पर लगाए गए पांच साल के प्रतिबंध को हटा दिया है। साथ ही आयोग और राज्य सरकार से जवाब पेश करने को कहा है। इससे 100 से अधिक अभ्यर्थियों को राहत मिली है।

आयोग के इस प्रतिबंध को चुनौती देती याचिका पर न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में सुनवाई हुई। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को इस तरह का प्रतिबंध लगाने का अधिकार ही नहीं है। मामले की अगली सुनवाई जून में होगी।

हरिद्वार निवासी प्रीति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि यूके ट्रिपल एससी की ओर से प्रदेश के विभिन्न विभागों के लिए 2020 में स्नातक स्तरीय परीक्षा कराई गई थी, जिसमें उनका भी चयन हुआ था। उनके शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन भी हुआ। इसी बीच चयन आयोग को एक शिकायत मिली कि परीक्षा में पेपर लीक हुआ है। इस शिकायत की जांच आयोग ने स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) से कराई। जांच के बाद एसटीएफ ने माना कि वास्तव में प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक हुआ है। आयोग ने कई संदिग्ध अभ्यर्थियों को कारण बताओ नोटिस भेजा। जिसका जवाब उनके द्वारा आयोग को दिया गया। इससे संतुष्ट न होकर आयोग ने उनके के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। साथ ही किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में बैठने के लिए पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया।

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