
बड़कोट। सड़क सुविधा के अभाव में करनाली गांव के ग्रामीण आज भी किस कदर जूझ रहे हैं, इसकी तस्वीर सोमवार को सामने आई।
देहरादून के अस्पताल से उपचार कराने के बाद गांव लौट रहे एक बीमार युवक के चलने में असमर्थ होने पर परिजनों और ग्रामीणों ने कुर्सी को डंडों से बांधकर अस्थायी स्ट्रेचर बनाया और करीब दो किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर गांव पहुंचाया। दुनकांणी तोक से करनाली गांव तक का यह सफर ग्रामीणों की वर्षों पुरानी सड़क की मांग और सरकारी व्यवस्थाओं की हकीकत बयां कर रहा है।
राज्य दिव्यांग सलाहकार बोर्ड के सदस्य सुरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि वह अपने बीमार भतीजे को देहरादून स्थित अस्पताल से उपचार कराने के बाद गांव लेकर लौट रहे थे। युवक की हालत ऐसी थी कि वह पैदल चलने में असमर्थ था। दुनकांणी तोक तक वाहन से पहुंचने के बाद आगे सड़क सुविधा नहीं होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों के सामने उसे गांव तक पहुंचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। इसके बाद ग्रामीणों ने कुर्सी को डंडों से बांधकर उसमें बीमार युवक को बैठाया और करीब दो किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर करनाली गांव पहुंचाया।
ग्रामीणों का कहना है कि करनाली गांव के लिए सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन वर्षों बीतने के बाद भी सड़क धरातल पर नहीं उतर सकी है। सड़क के अभाव में बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है।

