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चंपावत। चंपावत में विशेष सत्र न्यायाधीश अनुज कुमार संगल की अदालत ने एक व्यक्ति की हत्या और एससी एसटी एक्ट के चार आरोपियों पर दोषसिद्ध करते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उन पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।

विशेष सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सात साल पुराने हत्या और एससी एसटी एक्ट के मामले में सभी साक्ष्यों को देखने और गवाहों को सुनने के बाद कैलाश भट्ट, नवीन भट्ट निवासी बस्तिया गूंठ और रविंद्र भट्ट ऊफ रवीश भट्ट और नरेश भट्ट निवासी स्वाला को आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 50 हजार का जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। कोर्ट में आरोप सिद्ध करने के लिए 10 गवाह और 29 साक्ष्य प्रस्तुत किए।

जनवरी 2019 को दीपक कुमार निवासी बड़पास, जिला चंपावत हाल निवासी ग्राम बग्गा चौवन, जिला यूएस नगर ने चंपावत पुलिस को तहरीर देकर बताया कि पांच वर्ष पूर्व उसके भाई पप्पू कुमार ने धौन निवासी एक महिला से प्रेम विवाह किया था। 18 दिसंबर 2018 को उसका भाई पप्पू सुबह आठ बजे घर से चंपावत के लिए निकला था। वह अपना मोबाइल फोन ले जाना भूल गया था। तभी से वह लापता हो गया था। जनवरी 2019 को सूचना मिली कि उसके भाई का शव ग्राम धौन से लगभग दो-तीन किमी आगे एक होटल के नीचे खाई में मिला है।

सूचना पर वह मौके पर पहुंचे और पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार कर दिया। इसके बाद उसे पता चला कि उसका भाई पप्पू दिसंबर 2018 को रविश भट्ट नाम के एक व्यक्ति के टिप्पर वाहन से चंपावत के लिए बैठा था। रात करीब नौ बजे धौन में एक होटल में खाना खाने के लिए रुका था। वहां प्रार्थी के भाई का रविश, कैलाश, नवीन और नरेश भट्ट नाम के चालक से झगड़ा हो गया था। प्रार्थी ने आशंका जताई कि दूसरी जाति की महिला से शादी करने के कारण उसके भाई से रंजिश रखते थे। इस कारण उन्होंने भाई के साथ झगड़ा कर हत्या कर दी। इसके बाद पुलिस ने मामले में 302 और अनुसूचित जाति अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।

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