
देहरादून। हरिद्वार नगर निगम के चर्चित जमीन खरीद मामले में विजिलेंस कोर्ट ने तीन आरोपियों को बड़ा झटका दिया है।
विशेष न्यायाधीश सतर्कता अधिष्ठान अंजलि बेंजवाल की अदालत ने अभिषेक यादव, सुमन देवी और जितेंद्र कुमार की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने माना कि मामले की विवेचना जारी है और इस स्तर पर अग्रिम जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने तत्कालीन सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर सराय, ज्वालापुर (हरिद्वार) स्थित अपनी भूमि का भूमि उपयोग बदलवाया। आरोप है कि सर्किल दरों के अनुसार करीब 15.79 लाख रुपये मूल्य की इस भूमि को कथित आपराधिक षड्यंत्र के तहत 56.94 करोड़ रुपये में नगर निगम हरिद्वार को बेचा गया। इससे नगर निगम को लगभग 41.15 करोड़ रुपये की वित्तीय क्षति के साथ स्टांप शुल्क का भी नुकसान हुआ। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि तीनों आरोपियों ने एक महत्वपूर्ण तथ्य छिपाया था। उन्होंने इससे पहले हाईकोर्ट में भी अग्रिम जमानत याचिकाएं दाखिल की थीं, जिन्हें बाद में वापस ले लिया गया था, लेकिन निचली अदालत में दायर याचिकाओं में इसका उल्लेख नहीं किया गया। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि न्यायालय के समक्ष आने वाले पक्षकार को सभी तथ्य स्पष्ट रूप से रखने चाहिए। अदालत ने कहा कि मामला भ्रष्टाचार और सार्वजनिक धन से जुड़ा गंभीर प्रकरण है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले अग्रिम जमानत देने से विवेचना की निष्पक्षता और सफलता प्रभावित हो सकती है।

