
रुद्रपुर। सितारगंज थाना क्षेत्र के सुशांत सरकार हत्याकांड में तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुकेश चंद्र आर्या की अदालत ने गुरुवार को आरोपी विप्लव सरकार उर्फ रवि को दोषी करार देते हुए कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने हत्या के मामले में 10 हजार रुपये और साक्ष्य मिटाने और अपहरण से संबंधित धाराओं में कुल दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। हालांकि, अपहरण के लिए फिरौती मांगने से संबंधित धारा 364ए के आरोप में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया। अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने के आदेश दिए हैं। अदालती आदेश के अनुसार, विप्लव सरकार उर्फ रवि को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या के अपराध में कठोर आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 201 के तहत साक्ष्य मिटाने के अपराध में तीन वर्ष का कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, धारा 365 के तहत अपहरण के अपराध में भी तीन वर्ष का कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। इस जुर्माने के भुगतान में चूक होने पर भी तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 17 गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया गया। दोनों पक्षों के साक्ष्यों और तथ्यों पर विचार के बाद अदालत ने आरोपी को हत्या, साक्ष्य मिटाने और धारा 365 के अपराध में दोषी ठहराया। हालांकि, धारा 364ए के तहत फिरौती के लिए अपहरण के आरोप में संदेह का लाभ देते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लक्ष्मी नारायण पटवा ने पैरवी की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सुशांत सरकार के परिजनों ने आरोप लगाया था कि जून 2020 में उसे अगवा कर बंधक बनाया गया और उसे छोड़ने के बदले 80 हजार रुपये की मांग की गई। परिजनों को फोन पर धमकी दिए जाने की बात भी सामने आई थी। बाद में 28 अगस्त 2020 को शक्तिफार्म क्षेत्र में एक अज्ञात शव मिलने के बाद उसकी पहचान सुशांत सरकार के रूप में की गई। परिजनों ने विप्लव सरकार उर्फ रवि पर सुशांत की हत्या करने का आरोप लगाया था।



