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हल्द्वानी। यूरोप के देश माल्टा में नौकरी लगवाने के नाम पर हल्द्वानी के एक युवक से लाखों रुपये की ठगी कर ली गई। इतना ही नहीं पीड़ित को विदेश ले जाकर बंधक बनाने का भी आरोप है। पुलिस से शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं होने पर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली। अब अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हल्द्वानी की अदालत के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने देहरादून की दो इमीग्रेशन कंपनियों और उनकी महिला संचालक के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

 

मल्ला गोरखपुर निवासी गौरव ने कोर्ट में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि वर्ष 2024 में इंटरनेट के जरिए विदेश में नौकरी तलाशने के दौरान उसका संपर्क दीपिका नाम की महिला से हुआ। उसने खुद को देहरादून स्थित एक कंपनी की स्वामी बताया और गौरव को माल्टा यूरोप में किचन हेल्पर की नौकरी दिलाने का झांसा दिया। झांसे में आकर गौरव ने मई 2024 से मार्च 2025 के बीच महिला के बताए खातों में कुल 3,00,896 रुपये ट्रांसफर कर दिए।

 

गौरव ने बताया कि मामले की शिकायत जनवरी 2026 में हल्द्वानी कोतवाली और फरवरी में एसएसपी से की। मार्च में पुलिस ने बयान तो दर्ज किए, लेकिन आरोपियों पर मुकदमा दर्ज नहीं किया। इसके बाद कोर्ट की शरण ली। कोतवाल विजय मेहता ने बताया कि मामले में आरोपी दीपिका और उसकी दोनों फर्जी इमीग्रेशन कंपनियों पर धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और मानव तस्करी/बंधक बनाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।

गौरव के अनुसार, आरोपी महिला ने उन्हें माल्टा की एक कंपनी का फर्जी नियुक्ति पत्र और आइडेंटिटी कार्ड दिया। काफी समय बीतने के बाद भी जब माल्टा का वीजा नहीं मिला तो महिला ने बहाना बनाया कि पहले तीन महीने दुबई में नौकरी करनी होगी। इसके बाद में दुबई का टिकट भी कैंसिल कर दिया गया।

अक्तूबर 2025 में आरोपी महिला ने गौरव को दिल्ली के रास्ते कुआलालंपुर भेजा और कहा कि वहां से 10 दिन बाद माल्टा की फ्लाइट होगी। गौरव ने आरोप लगाया कि जब वह मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर पहुंचा तो वहां उसे एक बेहद छोटे और बदतर कमरे में 10-12 अन्य युवकों के साथ बंधक जैसी स्थिति में रखा गया। वहां अहसास हुआ कि वह अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और ठगी के गिरोह के जाल में फंस चुका है। गौरव किसी तरह 20 अक्तूबर 2025 को दिल्ली लौटा।

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