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नैनीताल। नैनीताल शहर के सात नंबर क्षेत्र स्थित ब्रिटिशकालीन ग्लेनमोर कोठी अग्निकांड की चपेट में आकर पूरी तरह जलकर खाक हो गई। लकड़ी से निर्मित यह ऐतिहासिक भवन आग की लपटों के सामने कुछ ही देर में ढह गया।

गनीमत रही कि घटना के समय भवन में कोई मौजूद नहीं था, जिससे जनहानि नहीं हुई। आग से लाखों की संपत्ति के नुकसान का अनुमान है। शहर की एक महत्वपूर्ण धरोहर नष्ट हो गई। आग लगने के समय कोठी में निवासरत ललित तिवारी और उनकी पत्नी चंद्रा तिवारी अपने बेटे से मिलने गुरुग्राम गए हुए थे। रविवार को जैसे ही वे लौटकर घर के समीप पहुंचे, लोगों ने उन्हें भवन से धुआं निकलने की सूचना दी। उन्होंने जैसे ही कमरे का दरवाजा खोला, भीतर आग की तेज लपटें उठती नजर आईं। आसपास के लोगों ने तत्परता से घर के भीतर रखा बिस्तर, गैस सिलेंडर और अन्य घरेलू सामान बाहर निकाला। लेकिन तेज हवा के झोंकों और पुराने लकड़ी के ढांचे के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में पूरी कोठी को अपनी चपेट में ले लिया। सूचना पर दमकल विभाग, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन आग की ऊंची लपटों के सामने पानी की बौछारें बेअसर साबित हुईं। संकरी सड़कों के कारण बड़े फायर वाहन समय पर घटनास्थल तक नहीं पहुंच सके। बाद में छोटे टैंकर और जल संस्थान के टैंकरों से पानी पहुंचाया गया, लेकिन तब तक भवन का अधिकांश हिस्सा जलकर राख हो चुका था।
आग की लपटें भवन के बाहर स्थित आउटहाउस की ओर बढ़ने लगी थीं। आसपास घनी आबादी होने के कारण बड़ा खतरा पैदा हो गया था। इस दौरान स्थानीय लोगों ने साहस और समझदारी दिखाते हुए मुख्य भवन और आउटहाउस के बीच बनी छत को तोड़ दिया, जिससे आग आगे फैलने से रुक गई और एक बड़ा हादसा टल गया।
अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि हाल में दमकल विभाग ने पुराने और जर्जर भवनों का निरीक्षण किया गया था। ग्लेनमोर कोठी पूरी तरह लकड़ी से निर्मित और आग के लिहाज से संवेदनशील पाई गई थी। इस संबंध में संबंधित दोनों परिवारों को अग्नि सुरक्षा उपकरण लगाने के निर्देशों के साथ नोटिस जारी किया था।
प्रशासन के अनुसार आग के वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं हैं। शॉर्ट सर्किट या किसी तकनीकी खराबी की आशंका है। वहीं लोगों का आरोप है कि भवन का पिछला हिस्सा नशेड़ियों का अड्डा था, जिससे आग जानबूझकर लगाने की भी आशंका है।
भवन के एक हिस्से में 1969 से अनिल तिवारी का परिवार निवास कर रहा था, जबकि दूसरे हिस्से में 1982 से चंद्रशेखर जोशी का परिवार रह रहा था। भवन के मुख्य मालिक देवी दत्त जोशी और उनका परिवार वर्तमान में नैनीताल से बाहर रहते हैं। लोगों ने घटना की सूचना सभी को दे दी है। ग्लेनमोर क्षेत्र का यह भवन ब्रिटिशकालीन वास्तुकला का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता था।

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