
देहरादून। सीबीआई की विशेष अदालत ने हरिद्वार ट्रेजरी से जुड़े 55 लाख रुपये से अधिक के घपले के 23 साल पुराने मामले में सहायक ट्रेजरी अधिकारी समेत आठ कर्मचारियों को दो साल तक का कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। सभी ने फर्जी बिलों से घपले को अंजाम दिया था। सीबीआई जज मदन राम की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। एक आरोपी को बरी कर दिया गया।
साल 2001-2002 के दौरान हरिद्वार ट्रेजरी में लोक निर्माण विभाग हरिद्वार और रुड़की के कर्मचारियों ने कुछ लोगों के साथ मिलकर एक बड़ी साजिश रची थी। वेतन बकाया, जीपीएफ एडवांस, मेडिकल क्लेम और स्टेशनरी के फर्जी बिल तैयार किए। इन्हीं बिलों के आधार पर ट्रेजरी से चेक जारी करवाकर उन्हें भुना लिया गया। यह पूरा घोटाला 55,10,511 रुपये का था।
केस दर्ज होने पर 31,99,945 रुपये वापस कर दिए गए। 8,13,418 रुपये की रिकवरी अब भी बाकी है। इस मामले में सात सितंबर 2002 को हरिद्वार के रानीपुर थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। बाद में नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने नौ अगस्त 2003 को केस दर्ज कर जांच शुरू की। सीबीआई ने 15 जून 2005 को 20 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और 26 मार्च 2009 को आरोप तय हुए।
अदालत ने दीपक कुमार वर्मा (एलडीसी, पीडब्ल्यूडी हरिद्वार), सुखपाल सिंह (यूडीसी, पीडब्ल्यूडी रुड़की), मदन पाल (मेट, पीडब्ल्यूडी हरिद्वार), मनी राम (बेलदार, पीडब्ल्यूडी हरिद्वार), सुरेंद्र कुमार उर्फ शर्माजी (ड्राइवर, पीडब्ल्यूडी हरिद्वार), चतर सिंह (रोलर ड्राइवर, पीडब्ल्यूडी रुड़की), कासिम (सेवानिवृत्त बेलदार, पीडब्ल्यूडी हरिद्वार), पालू दास (सहायक ट्रेजरी अधिकारी, हरिद्वार) को सजा सुनाई। अदालत ने मामले में एक आरोपी प्रदीप कुमार वर्मा को बरी कर दिया।

