
देहरादून। ढाई लाख रुपये की उधारी न चुकाने पर किए जा रहे टार्चर के दौरान बसंत विहार निवासी दिगंबर की हत्या हो गई थी। रविवार को पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दिगंबर के जेल में रहने के दौरान हत्यारोपियों की उससे दोस्ती हुई थी।
एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल ने प्रेस वार्ता में दिगंबर हत्याकांड का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि शास्त्री नगर निवासी संतराम धीमान ने बीते 11 फरवरी को बसंत विहार थाने में अपने बेटे दिगंबर धीमान के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। बताया कि नौ फरवरी को उनका बेटा देहरादून कोर्ट में अपने खिलाफ चल रहे पॉक्सो केस की तारीख पर गया था। कोर्ट से सुनवाई की अगली तारीख मिलने पर वह वहां से निकला और लापता हो गया। पुलिस ने जांच शुरू की तो एक टैक्सी चालक दिगंबर के जाने के रूट पर मिला। 17 फरवरी को पुलिस ने टैक्सी चालक राजनंदन निवासी न्यू पटेलनगर को गिरफ्तार किया।
उससे पता लगा कि नौ फरवरी की रात हत्यारोपियों में शामिल हेमंत ने उसकी टैक्सी बुलाई। 15 हजार रुपये देकर रेसकोर्स से शव ठिकाने लगाने को हरिद्वार जिले के चिड़ियापुर के जंगल में ले गए। शव को वहां नहर के पास जंगल में मिट्टी में दबाकर वापस आ गए। तब मामले में हत्या का केस दर्ज हुआ। चूंकि, हत्या रेसकोर्स में हुई। इसलिए केस भी बसंत विहार से नेहरू कॉलोनी थाने ट्रांसफर हुआ। एसएसपी डोबाल ने बताया कि रविवार को आईएसबीटी के पास से हत्यारोपी हेमंत कुमार (37), आदिल (38) और वैभव भट्ट (25) निवासी नई बस्ती, सी ब्लॉक रेसकोर्स को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों से पूछताछ में पता लगा कि दिगंबर से जेल में उनकी दोस्ती हुई।

