
नैनीताल। भीमताल थाना क्षेत्र में चार वर्ष पहले हुए चर्चित हत्याकांड में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। काठगोदाम–भीमताल मार्ग पर हेयरपिन बैंड के पास युवक की गोली मारकर हत्या किए जाने के मामले में न्यायालय ने अभियुक्ता अमरीन जहां और उसके साथी राधेश्याम शुक्ला को दोषी ठहराया है। दोनों को आजीवन कारावास की सजा के साथ 20-20 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया है। वहीं अवैध हथियार रखने और इस्तेमाल करने के आरोप में राधेश्याम को आर्म्स एक्ट के तहत तीन वर्ष का अतिरिक्त कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
घूमने का बहाना, मौत का इंतजाम
अभियोजन के अनुसार घटना 2 जनवरी 2020 की दोपहर करीब 2:30 बजे की है। अभियुक्ता अमरीन जहां, निवासी इन्द्रानगर हल्द्वानी, अपने दोस्त राधेश्याम शुक्ला के साथ मिलकर साजिश रच चुकी थी। उसने रिपोर्टकर्ता वाजिद अली खान के भाई नाजिम अली को भीमताल घुमाने के बहाने हल्द्वानी से साथ ले गई। राधेश्याम अपनी मोटरसाइकिल से पीछे-पीछे आया।
जब तीनों काठगोदाम–भीमताल रोड पर चंदा देवी मंदिर के पास हेयर पिन बैंड पहुंचे तो घूमने के बहाने वाहन रोके गए। इसी दौरान राधेश्याम ने अमरीन, मृतक नाजिम और अपनी फोटो भी खींची। मौका पाते ही राधेश्याम ने 315 बोर के तमंचे से नाजिम पर बेहद नजदीक से गोली चला दी और मौके से फरार हो गया।
एक्सीडेंट का झांसा, अस्पताल में मौत
गोली लगने के बाद अमरीन ने मृतक के मोबाइल से उसके भाई वाजिद अली को फोन कर एक्सीडेंट होने की झूठी सूचना दी और नाजिम को बृजलाल अस्पताल ले जाने की बात कही। गंभीर हालत में नाजिम को बोलेरो वाहन से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दौरान अमरीन संदिग्ध व्यवहार करते हुए भागने लगी, जिसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
मोबाइल, तमंचा और खून से सने कपड़े बने अहम सबूत
जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा ने अदालत में बताया कि पुलिस ने अभियुक्त राधेश्याम को गिरफ्तार कर उसकी तलाशी ली, जिसमें उसका मोबाइल बरामद हुआ। मोबाइल में घटना के समय ली गई पांच फोटो मौजूद थीं। अभियुक्त की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा, खोखा व जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए।
इसके अलावा घटना के समय पहने गए खून से सने कपड़े अभियुक्त के घर से बरामद हुए। फोरेंसिक जांच में पुष्टि हुई कि अभियुक्त के कपड़ों पर लगा खून मृतक नाजिम का ही था। विवेचना के दौरान मृतक, अमरीन और राधेश्याम के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और लोकेशन भी जुटाई गई, जिससे तीनों की मौजूदगी घटना स्थल पर सिद्ध हुई।
प्रेम प्रसंग बना हत्या की वजह
पुलिस पूछताछ में अमरीन ने स्वीकार किया कि उसके और नाजिम के बीच प्रेम संबंध थे। नाजिम द्वारा दूसरी लड़की से शादी कर लेने से वह नाराज थी, क्योंकि नाजिम ने उससे शादी का वादा किया था। इसी रंजिश में अमरीन और राधेश्याम ने मिलकर नाजिम की हत्या की साजिश रची।
17 गवाह, सीसीटीवी फुटेज से मजबूत हुआ केस
अभियोजन पक्ष ने कुल 17 गवाहों का परीक्षण कराया, जबकि मोबाइल साक्ष्य सिद्ध करने के लिए तीन नोडल अधिकारियों के बयान दर्ज कराए गए। इसके अलावा हल्द्वानी शहर, काठगोदाम और भीमताल मार्ग पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में अभियुक्तगण व मृतक को वाहनों से आते-जाते हुए देखा गया, जिससे अभियोजन का केस और मजबूत हुआ।
न्यायालय की सख्त टिप्पणी
सजा सुनाते हुए न्यायालय ने कहा कि हत्या पूरी तरह पूर्व नियोजित और साजिश के तहत की गई। अभियुक्तों ने मृतक को सुनसान स्थान पर बहला-फुसलाकर ले जाकर बेहद नजदीक से गोली मारी, जिससे उसके बचने की कोई संभावना नहीं रही। घटना से पहले और बाद में अभियुक्तों का आचरण मानवीय मूल्यों की घोर उपेक्षा दर्शाता है।
न्यायालय ने अपने निर्णय में कुरान शरीफ और मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्दोष की हत्या करना पूरी इंसानियत की हत्या के समान है। साथ ही मृतक के परिजनों को उत्तराखंड अपराध से पीड़ित सहायता योजना के अंतर्गत मुआवजा देने के आदेश भी दिए गए हैं।
फैसले के बाद दोनों अभियुक्तों के खिलाफ सजायाफ्ता वारंट जारी कर उन्हें सजा भुगतने के लिए जेल भेज दिया गया।

